23 मिनट पहलेलेखक: शैली आचार्य
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यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।
यानी जहां स्त्रियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। जहां नारी को नहीं पूजा जाता, उनका सम्मान नहीं किया जाता, वहां किए गए सारे अच्छे काम भी निष्फल हो जाते हैं।
लेकिन आज जो हम समाज में होता देख रहे हैं, वह तस्वीर बिलकुल उल्टी है। न तो महिलाओं को सम्मान मिल रहा है और न ही वे सुरक्षित महसूस कर रही हैं। उन्हें या तो ‘घर की इज्जत’ बनाकर चारदीवारी में कैद कर रखा है या फिर पतिवृता धर्म के नाम पर पुरुषों की यातनाएं सहना उनका ‘धर्म’ बताया है। लेकिन जब महिलाएं अपनी बेड़ियां तोड़कर चारदीवारी से बाहर आईं भी तो हमने उन्हें सुरक्षित घर वापस नहीं जाने दिया।
दिन हो या रात, रास्ते में जाते हुए महिलाओं को वो घूरती आंखें, सड़क पर धीमी होती मोटर साइकिलें, बसों या मेट्रो में महिलाओं को गलत तरीके से छूते हाथ, दफ्तरों में रोज नजरअंदाज होते असहज हालात। ये सारी वो चीजें हैं, जो हर एक महिला कई दिन में एक बार नहीं, बल्कि एक दिन में कई बार झेलती है।
बात इसलिए उठी है क्योंकि हाल ही में देश के उस राज्य बंगाल में मानव सभ्यता का सबसे जघन्य अपराध हुआ है, जहां ‘देवी पूजा’ से बड़ा और कोई पर्व नहीं और जिस राज्य की संस्कृति में ही महिलाएं पुरुषों से एक पायदान ऊपर हैं।
बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक जूनियर महिला डॉक्टर के साथ रेप कर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद महिला सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े हो गए है। बलात्कार जैसे अपराध पर जितना जरूरी बोलना है, उतना ही जरूरी है इससे बचाव के तरीके भी सीखना।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध दर 2021 में 56.5% से बढ़कर 64.5% हो गई है।
इसलिए आज ‘सेल्फ रिलेशनशिप’ कॉलम में हम आपको कुछ ऐसे सेल्फ डिफेंस यानी आत्मरक्षा के तरीके बताएंगे, जो ऊपर बताए हालात में लाइफ सेविंग साबित हो सकते हैं।

रेप, एब्यूज और इन्सेस्ट नेशनल नेटवर्क (Rape, Abuse & Incest National Network) की रिपोर्ट के मुताबिक, यौन हिंसा के 70% मामले किसी अनजान व्यक्ति द्वारा नहीं बल्कि उन लोगों द्वारा किए जाते हैं, जिन्हें हम जानते हैं। जिनमें दोस्त, परिवार, साथी, सहकर्मी आदि शामिल हैं।
इन घटनाओं पर एकदम से लगाम लगा पाना तो किसी के लिए संभव नहीं है। लेकिन महिलाओं को खुद केपेबल होना चाहिए यानी उन्हें अपनी रक्षा खुद करना आना चाहिए। भोपाल के मार्शल आर्ट्स और सेल्फ डिफेंस एंड फिटनेस ट्रेनर वीपी सिंह राणा ने सेल्फ डिफेंस की कुछ टेकनीक बताई हैं। नीचे ग्राफिक में देखें-

- हैमर स्ट्राइक
हैमर स्ट्राइक का इस्तेमाल आप तब कर सकते हैं, जब खतरा आपके सामने तक आ पहुंचे। आप अपने बैग में पड़ी गाड़ी, स्कूटी या घर की चाबी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें पहला तो है कि अपने पल्लू या ड्रेस कोई ऐसा हिस्सा, जिसमें आप चाबी बांधकर उसे पेंडुलम की तरह घुमाकर हमलावर के चेहरे पर वार कर सकती हैं।
अगर चाबी को बांधने का समय न मिले तो चाबी को हाथ में चाकू की तरह घोंपने वाली पोजिशन में टाइट पकड़ें और फिर हमला करें। कुछ न भी मिले तो ऑफिस के आई कार्ड का पट्टा भी चाबी में बांधकर जोरदार तरीके से मारा जा सकता है।
- सेंसिटिव पार्ट्स पर अटैक करें
हमलावर के सेंसिटिव पार्ट्स जैसे आंखें, नाक, गला, कमर और दोनों पैरों के बीच में ज्यादा ताकत के साथ हाथ या पैर से प्रहार करें। बिल्कुल घबराएं नहीं। अपनी आवाज का भी इस्तेमाल करें। हमलावर को डराने के लिए जोर से चिल्लाएं।
- ओपन हैंड स्ट्राइक
अपने हाथ या मुक्के से आप हमलावर के नाक या गले को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हाथ से अपनी कलाई को मोड़ें, हमलावर की नाक पर निशाना लगाएं, नाक के ऊपर की ओर वार करें या हमलावर की ठोड़ी के नीचे या गले पर ऊपर की ओर वार करें। इसके बाद अपने हाथ को जल्दी से पीछे खींचने से हमलावर के सिर को ऊपर और पीछे धकेलने में मदद मिलेगी। इससे हमलावर पीछे की ओर लड़खड़ाएगा, जिससे आप उसकी पकड़ से बच जाएंगे।
- अपर एल्बो और बैक एल्बो से मारना
यदि हमलावर आपके बहुत करीब है और आप जोरदार मुक्का या किक नहीं मार पा रहे हैं तो अपनी एल्बो यानी कोहनी का इस्तेमाल करें। इससे आप हमलावर को पीछे धकेल पाएंगे।
- ग्रोइन किक (Groin Kick)
ये किक सेल्फ डिफेंस के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है। अगर हमलावर आगे से अटैक कर रहा है तो आप इस किक का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसमें आप अपनी एड़ी को पीछे की ओर मोड़ें ताकि आपका पैर त्रिकोण बन जाए। घुटने को ऊपर की ओर ले जाकर हमलावर की टांगों के बीच में वार करें।
ओरेगन विश्वविद्यालय में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सेल्फ डिफेंस क्लास में भाग लेने वाली महिलाओं ने महसूस किया कि-
- उनके पास इमर्जेंसी वाली सिचुएशन के लिए बेहतर सुरक्षा रणनीतियां थीं।
- किसी अजनबी या अपने परिचित लोगों द्वारा संभावित हमले या दुर्व्यवहार से निपटने के लिए वे ज्यादा सक्षम थीं।
- सेल्फ डिफेंस सीखने के बाद उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा।

- हैंडबैग में पेपर-स्प्रे साथ रखें
पेपर स्प्रे आप आसानी से बैग में कैरी कर सकते हैं। कुछ पेपर स्प्रे में ग्लास ब्रेकर भी लगा आता है। इसके इस्तेमाल से सामने वाले की आंखों में और रेस्पिरेटरी सिस्टम में तेज जलन होने लगती है। इसके इस्तेमाल से ही छींकें और खांसी आने लगती है, जिससे आपको बचकर निकलने का समय मिल जाता है। यह काफी ज्यादा असरकारक है।
- स्मार्टफोन में वुमन सेफ्टी ऐप इंस्टॉल करें
वैसे इसके चांस कम ही होते हैं कि सारी महिलाएं अपने हैंडबैग में पेपर-स्प्रे जैसी चीज रखती हों। लेकिन अगर आपके पास खतरे की घड़ी में ये नहीं है तो एक चीज तो जरूर ही होगी और वो है आपका फोन।
स्मार्टफोन में बहुत सारे ऐसे ऐप्स होते हैं, जो खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही बनाए गए हैं। इन्हें अपने फोन में इंस्टॉल कर सकते हैं और इमरजेंसी में यूज कर सकते हैं। इससे होगा ये कि जब कभी भी आपको खतरा महसूस हो तो फोन के लॉक बटन को तीन या चार बार लगातार दबाने पर आपके सेट किए हुए कॉन्टेक्ट (परिवार या दोस्त) के फोन पर आपकी लाइव लोकेशन के साथ खतरे का अलर्ट भी पहुंच जाएगा।
- पुलिस या हेल्पलाइन नंबर पर फोन लगाएं
मुसीबत आने पर या उसका एहसास होने पर मदद के लिए तुरंत पुलिस को फोन लगाएं। महिलाओं की सुरक्षा के लिए वुमन सेल, NGOs बने हैं, जो 24 घंटे महिलाओं की सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं।
-वुमन हेल्पलाइन नंबर- 1091
-इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर- 112
-राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)- 7827170170
-शक्ति शालिनी-महिला आश्रय (NGO)- 011-24373736/24373737
-अखिल भारतीय महिला सम्मेलन (AIWC)- 10921/011-23389680
-साक्षी (NGO)- 0124-2562336/5018873
-सामाजिक कानूनी सूचना केंद्र (SLIC)- 911124374501